दुदु-जिला सामान्य जानकारी*
दूदू जिला राजस्थान की राजधानी जयपुर से दूरी -60kmप्राचीन नाम दादूवती नगरी, दादूवाडी था और आमेर के राजा मानसिंह प्रथम(मोजमाबाद में जन्म) ने 1579 ई.में संत दादू दयाल आमेर के नारायण (नरेना) गांव में आगमन पर इस गांव की स्थापना करवाई ,और इसका नाम दादू दयाल जी के नाम पर दादूवाड़ी नगरी रखा जो कालांतर में दादू से दूदू पड़ा गया, दादू से दूदू बनने का मुख्य कारण यहां अधिक दूध का उत्पादन होना और इस दूध का प्रयोग सीधा जयपुर राज परिवार द्वारा किया जाने पर अधिक दूध उत्पादन पर दादू से दूदू कहना भी ह,इस इतिहास का उल्लेख कहीं नहीं मिलता सिर्फ दादू वाणी दादू ग्रंथ में दूदू के इतिहास की जानकारी मिलती है,
औसत ऊंचाई -377मीटर (1237 फीट)
कुल जनसंख्या 3,12,958
उपखण्ड -3
तहसील -3
दूदू ज़िले में सम्मिलित कुल गांव -341
कुल ग्राम पंचायत -60
पंचायत समिति -3
कुल नगर पालिका -2
भाषा(बोलीं) डूंढाड़ी (बहुतायत में) राजस्थानी हिन्दी अंग्रेजी
लोकसभा क्षेत्र – अजमेर
वाहन पंजीकरण -RJ 47
जनसंख्या घनत्व 203 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर (2011के अनुसार)
साक्षरता दर 61.98
दूदू जिले कि जनसंख्या जर्मनी के शहर बोर्न के बराबर है।, दूदू जिले की स्थापना आमेर के राजा मानसिंह प्रथम ने सन 1570 के आसपास की, दूदू गांव की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सन 1579 में दादू दयाल जी के नरेना आगमन पर राजा मानसिंह उनसे शिष्टाचार भेंट की और दादू दयाल जी को अपना गुरु बनाया, गुरु दक्षिणा के तौर पर राजा मानसिंह ने दादूवाड़ी, दादूवती नाम के गांव की स्थापना करी, और उसे गांव से जो कर या राजस्व प्राप्त होता वह सीधा दादू द्वारा में दिया जाता दादू दयाल को अपने पंत को चलाने में सहायता हेतु आर्थिक सहायता हेतु इस गांव का निर्माण करवाया गया और यहां से प्राप्त संपूर्ण राजस्व को सीधा दादू द्वारा को दिया जाता था, लगभग 1700, ई तक यहां का राजस्व सीधा दादू द्वारा नरेना में दिया जाता था, बाद में मुगल शासक मुआजम, जो औरंगजेब के पुत्र थे के आमेर पर आक्रमण किया, जिसमें मोजमाबाद और इसके आसपास के सभी गांव को अपने अधीन कर लिया और आमेर का नाम बदलकर मोमीनाबाद कर दिया जो लगभग 9 महीना तक शासन किया इसी बदौलत मोजात का नाम बदलकर मोजमाबाद मोमीनाबाद हुआ क्योंकि आमेर की राजधानी मोजमाबाद हुआ करती थी, राजा मानसिंह ने दादू दयाल जी के सम्मान में दूदू गांव में वह संपूर्ण व्यवस्था सुविधा करी जिससे यहां के निवासियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यहां हनुमान सागर नाम का तालाब का निर्माण करवाया और बजरंगबली के मंदिर का निर्माण करवाया उसी के पास गांव में पेयजल व्यवस्था के लिए शानदार बावड़ी का निर्माण करवाया, एक अपने पिता भारमल के नाम से भारमल की बावड़ी का निर्माण करवाया, दूदू से प्राप्त संपूर्ण राजस्व को इकट्ठा करने के लिए, किसी प्रकार का सैन्य व्यवस्था नहीं की गई लोग स्वेच्छा से अपनी इच्छा अनुसार राजस्व सीधा गुरुद्वारा के दरबार में जाकर भेंट करते थे, यहां की प्रजा बिल्कुल सुरक्षित और संपन्न प्रजा थी , क्योंकि यहां किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होता था, दादू दयाल का आदेश ही यहां सर्वमान्य होता था, लगभग 1720 के बाद जब मुगल आक्रमण हुआ तब सवाई जयसिंह ने, दूदू मोजमाबाद फागी और आमेर को मुगलों से मुक्त करवाया ,और यहां दूदू में एक भव्य किले का निर्माण करवाया ,और खंगारोत कचवाहा शासक आनंद सिंह खंगारोत,को इस गढ़ का शासक बनाया, इसके बाद आनंद सिंह खंगारोत के पुत्र पहाड़ सिंह शासक बने जिन्होंने तुंगा के युद्ध महादजी जी सिंधिया को बुरी तरह पराजित किया, तुंगा की युद्ध में मराठाओ को बुरी तरह पराजित करने वाले दूदू के शासक पहाड़ सिंह की छतरी दूदू में तालाब की पाल पर बनी हुई है, दूदू में आनंद सिंह जी की छतरी अपनी उत्कृष्ट कला के लिए प्रसिद्ध है , दूदू के 7 राजाओं ने जयपुर के लिए युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुए दूदू के शासको की छतरी पुष्कर सरोवर की पाल पर बनी हुई है जहां उन्होंने पुष्कर सरोवर को बचाने के लिए युद्ध किया, मोजमाबाद के युद्ध में दूदू और मोजमाबाद के शासको ने वीरता का परिचय दिया और बीकानेर की सेवा और मराठाओं की फौज को दांतों चने चबाए दूदू का शासन मोजमाबाद के अधीन था , मोजमाबाद खालसा भूमि थी, जो सीधा जयपुर राज परिवार के अधीन थी, जो मुख्य आमेर की राजधानी भी थी, खंगारोत शासको को दूदू का राजस्व दादू दयाल आश्रम में जमा करवाना होता था, जो धीरे-धीरे स्वेच्छा से दादू दयाल आश्रम द्वारा नहीं लिया गया तो बाद में राज कार्य में इसका उपयोग होने लगा, इस चीज का उल्लेख दादू वाणी ग्रंथ में उपलब्ध है, दूदू मोजमाबाद और फागी तीनों के शासक कचवाहा नरेश रहे, दूदू के मुख्य चौक पर राजा मानसिंह ने न्याय की देवी जमवाय माता का मंदिर का निर्माण करवाया , जो वर्तमान में नष्ट हो चुका है, जिसे वर्तमान में करनी चौक कहा जाता है, दूदू ठिकाना खंगारोतों के 22 ताजमी हाथी बंध ठिकाना था, ऐतिहासिक स्थल, – मोजमाबाद आमेर नरेश राजा मानसिंह प्रथम क्चवाह मूल जन्म स्थान मोजमाबाद महल वर्तमान तहसील मुख्यालय बिल्डिंग और प्राचीन आसन महल, शिव सागर वाटिका धाम (पालोलिया नाड़ी) साखून, पुरातत्व गढ़ पैलेस साखूनफोर्ट, छापरवाडा बांध, खाटु श्याम जी का मंदिर दूदू ,दादू खोल भेराना की पहाड़ी बिचुन, भुतो की बावड़ी मौजमाबाद(एक रात में निर्माण), मोजमाबाद
संत धन्ना भगत की जन्मस्थली -चौरु दूदू का किला,
विशेष -आमेर शासक मानसिंह की जन्मस्थली मौजमाबाद, महत्यागी संत श्री मोहन दास जी मोनी बाबा की तपस्या स्थली साखून
-आधार कार्ड योजना की सुरुवात दूदू से हुई
-राज्य का प्रथम ट्रोमा अस्पताल दूदू में बना
-प्रमुख मेला वीर तेजाजी मेला साखून,वीर तेजाजी मेला दूदू, मोहन महाराज का मेला खुडियाला
-प्रमुख दरगाह -पीर अमीर अली शाह की दरगाह
-500 वर्ष प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर मौजमाबाद ( गुफाओं का मंदिर)
-न्याय का चबूतरा मौजमाबाद (जब भी दो समुदायों या लोगों के बीच राड होती तो यहां न्याय किया जाता था बिना भेदभाव के)
विश्व प्रसिद्ध सयुक्त परिवार की मिसाल,800 साल पुरानी,52 चुल्हो की हवेली मौजमाबाद (निर्माता पंचोली ब्रह्मण परिवार ) 500 साल पुरानी रानी जी की छतरी 20 खम्बो की इटालियन मार्बल से निर्मित,, मोजमाबाद 7 बावड़ियां ,,2000साल तक प्राचीन बावड़ियां मोजमाबाद प्राचीन नरुकाओ की महासतिया और उनकी छतरिया प्राचीन निवास स्थान आसन मोजमाबाद महल ,,मोजमाबाद, 2000 वर्ष पुराना प्राचीन त्रिपोलिया दरवाजा भारत का प्रथम त्रिपोलिया दरवाजा , भोज शासक मूंज द्वारा निर्मित ,, नरूका ओं द्वारा जीत,,,, मोजमाबाद,, नया सागर प्राचीन मान सागर बांध,,,,मोजमाबाद, 7- प्राचीन मंदिर राधा गोविंद चारभुजा नाथ मंदिर,जेन मंदिर, बड़ा मंदिर छोटा कांच का जैन मंदिर, 500 साल से 1000 साल तक पुराने मंदिर,मोजमाबाद, मौज मंदिर मोजमाबाद, रघुनाथ जी मंदिर मोजमाबाद,पारस शिवलिंग मंदिर माली मोहल्ला मोजमाबाद , प्राचीन 800 साल पुराना ठाकुर जी का मंदिर कुमावत मोहल्ला मोजमाबाद, राजा भारमल का शिव मंदिर मानसागर तालाब की पाल मोजमाबाद , बजरंगबली का मंदिर प्राचीन मानसागर तालाब मोजमाबाद , गढ़होई वाले बालाजी महाराज मंदिर मानसागर मोजमाबाद ,,: प्राचीन वीर बजरंगबली मंदिर गंगाती खुर्द मोजमाबाद ,, दादा शिवकरण जी निठारवाल सोलंक्या धीराव तलाब बांध गंगाती खुर्द, दादा हनुमान सागर डेम गंगती खुर्द,,,,,, प्राचीन 1200 साल पुराना करणी माता मंदिर गंगाती खुर्द मोजमाबाद,, राजस्थान का प्रथम रानी सती माता मंदिर जाटों की, गंगाती खुर्द मोजमाबाद,,मानसिंह प्रथम मूल जन्म स्थान वर्तमान तहसील मुख्यालय से लेकर 3 किलोमीटर तक की जमी दोज गुफाएं ,,,,मोजमाबाद, 800 साल पुराना प्राचीन क्छवाहा शासकों द्वारा निर्मित सुंदर गढ़, आसन मोजमाबाद ,,, 7_प्राचीन तालाब,,,आम का बाग धमाना मोजमाबाद,,, प्राचीन अकबर मस्जिद ,,और दो 1000साल पुरानी मजारे, राव कल्ला रामोत जोधा सोजत पाली , अमझेरा रियासत के मूल पुरुष की छतरी त्रिपोलिया तालाब की पाल, मोजमाबाद स्वामी भक्त वीर शिरोमणि कान्हा आड़ा चारण जी की भव्य छतरी राजा मानसिंह महल आसन की त्रिपोलिया तालाब की पाल पर, मोजमाबाद,शासक ,मोजमाबाद_,,, पीर बाबा की मजार मोजमाबाद 550साल पुरानी कन्होजी आडा ,,बीकानेर की छतरी आसन महल शिवगढ़ मोजमाबाद , प्राचीन गढ़ गणेश मंदिर बिचुन मोजमाबाद प्राचीन किला बिचुन ,,,,,,, भैराणा धाम संत दादू दयाल निर्वाण स्थली बिचुन मोजमाबाद, प्रसिद्ध बंदे के बालाजी मंदिर उग्रीयावास बंदे ,,,,, प्राचीन बोराज गढ़ बोराज, राजा भारमल की बावड़ी, मोजमाबाद, मोजमाबाद ,, प्राचीन महला गढ़ महला मोजमाबाद, हिंगोनिया बांध हिंगोनिया महला ,मोजमाबाद, समेलिया छोटा डिगी विष्णु मंदिर समेलिया फागी ,, प्राचीन राधा गोविंद मंदिर फागी अकबर का किला साखुन दुदू करमचंद जयमल जी नरूका की छतरिया, पृथ्वीराज कचवाहा की बावड़ी मानसागर तालाब की पाल मोजमाबाद ,,, प्रसिद्ध चार भुजा नाथ राधा गोविंद मंदिर मोजमाबाद,,,,,, राजस्थान का प्रथम सिंचाई विभाग मुख्यालय की स्थापना 1895=हुई मोजमाबाद ,,,,
-फागी – प्राचीन नाम हीरापुर/हिम्मत नगर इसे अयोध्या नगरी भी कहा जाता था,, फागी में राजा मानसिंह जी द्वारा निर्मित तालाब, फागी तालाब वाले बालाजी महाराज के मंदिर का निर्माण राजा मानसिंह प्रथम ने करवाया, फागी की स्थापना फागना नाम के जाट ने करी , जो बाद में गंगाती आकर रहने लगे, फागी पूर्णता उजड़ चुका था उसको दोबारा बसाने का काम राजा मानसिंह प्रथम ने किया,
-पद्मश्री से सम्मानित व्यक्ति – लक्ष्मण सिंह (लापोड़िया गांव) जल संरक्षण हेतु,,, प्रथम राष्ट्रीय पक्षी मोर संरक्षण हेतु राष्ट्रपति पुरस्कार हेतु नामित महिला(नाबार्ड )स्वर्गीय झमकू देवी निठारवाल धर्मपत्नी स्वर्गीय हनुमान जी निठारवाल गंगाती खुर्द मोजमाबाद(,ने सिर्फ दो मोर से 600 मोरों तक की संख्या तक राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण व सर्वदन हेतु काम करने पर) ,दूदू का सबसे ऊंचा पर्वत भेरणा बिचुन पर्वत, दूदू क्षेत्र का लाल पत्थर वाला पर्वत मोखमपुरा मोजमाबाद,दूदू की सबसे बड़ी मार्बल ग्रेनाइट खान घट्याली कुंडली फागी दूदू की सबसे बड़ी अभ्रक ख़ान अमरपुरा कल्याणपुरा मोजमाबाद,, दूदू का सबसे बड़ा पुरातात्विक सभ्यता स्थल डेमंड टीला अखेपुरा गंगाती खुर्द,,,,, दूदू के प्रथम राजकीय कर्मचारी स्व .शिवकरण जी निठारवाल 1947 गंगाती खुर्द,,, मौज मंदिर मोजमाबाद ,,मोजमाबाद सावरदा पोर्ट सावरदा मोजमाबाद गुरुद्वारा कानडदास साहिब सावरदा गुरुग्रंथ की रचना स्थल गुरुनानक देव का तपोस्थली सावरदा मोजमाबाद सावरदा राज परिवार कि छतरिया सावरदा मोजमाबाद , मोजमाबाद परमार शासको का किला , जैन व्यापारियों की हवेली मोजमाबाद, राजा जी का कुआं मौजमाबाद, रानी कनकावती की छतरी मौजमाबाद, रानी भगवती बाई परमार का महल राजा मानसिंह की माता का महल मोजमाबाद, त्रिपोलिया तालाब मोजमाबाद, त्रिपोलिया तालाब वाले बालाजी महाराज का मंदिर मोजमाबाद, प्राचीन शिव मंदिर राजा मानसिंह महल मोजमाबाद, बड़जातिया जैन हवेली मोजमाबाद ,मरवा पोर्ट मरवा दूदू गुरुद्वारा संत धन्ना जी चोरू फागी दूदू जिले की प्रमुख नदियां मांसी, बांडी, आदि प्रमुख नहरे दादा शिवकरण जी निठारवाल सोलंक्या धीराव तालाब बांध गंगाती खुर्द मोजमाबाद,छापरवाड़ा मोजमाबाद दूदू, कालख , मानसागर मोजमाबाद, हिंगोनिया बांध ,महला मोजमाबाद ,चोरू तालाब आदि, दूदू की सबसे बड़ी नहर कालख बांध नहर , दूसरी बड़ी नहर छपरवाड़ा ,मोजमाबाद दूदू छेत्र की प्रमुख फसलें खरीफ मूंग ज्वार बाजरा तिल उड़द मूंगफली मक्का ग्वार,, आदि
रबी _चना सरसो गेहूं जो मटर आदि जायद – मतिरा खरबुज ककड़ी आदि दूदू की प्रमुख मिठाई – दूध मावा रबड़ी ,, , दूदू जिले का प्रमुख लोक गीत -तेजा गीत, दूदू जिले में गाए जाने वाला प्रमुख भजन राजा मानसिंह के भजन ,दूदू जिले का प्रमुख लोक नृत्य-तेजा बिंदोरी नृत्य,,,, राजमार्ग -NH 8,,,सबसे व्यस्त और लम्बा ,,SH-2 ,,OR ,,,SH-37,, SH 100, MDR 86 आदि,,, लेख कमलेश जाट (इतिहासकार),,,9694586671
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